हे परोपकारी आत्मा,
चलिए शुरू करते है आज का कॉस्मिक मेल हमारे अलौकिक पिता ब्रम्हांड का शुक्रिया करते हुए।

सवाल: क्या हर धर्म के इंसान आपके बच्चे है?

अलौकिक पिता परमात्मा का जवाब:

“मेरे प्यारे बच्चो,
मैं आपका अलौकिक पिता परमात्मा हूं। मैं हमेंशा चाहता हूं की मेरे बच्चे बहोत खुश रहे। मेरे बच्चो के सवाल मे ही जवाब है वैसे तो। धर्म पे पहले भी बात कर चूका हूं मैं। मेरा धर्म से कोई लेना देना नहीं है और नहीं मैंने धर्म बनाया है। धर्म मेरे बच्चो ने बनाया है। मैंने किसी भी आत्मा पे कोई ठप्पा नहीं लगाया की कौनसी आत्मा किस धर्म की है।

अच्छा है उदाहरण देता हूं। कोई एक उत्पादन कंपनी अगर अपने प्लांट मे पेरासिटामोल ड्रग की दवाइया बनाती है और वह अलग अलग मार्केटिंग कंपनी को बेचती है और ज़ाहिर सी बात है हर मार्केटिंग कंपनी उस दवाई को अलग नाम देके अपना ठप्पा लगाएगी, उसमे लेकिन असल मैं तो वह पेरासिटामोल ही है। तो यहाँ मेरे बच्चे भी कुछ ऐसा ही कर रहे है। अलग अलग धर्म के ठप्पे लगाके अपने आपको हर एक से अलग बना लेते है पर असल मे तो हर एक के अंदर वही तत्त्व आत्मा का तत्त्व है।

तो हा, मेरा संबंध तो मेरे बच्चो की आत्मा से है ना की उनके धर्मो से। तो हर वो धर्म जो आपने बनाये है उस से मेरा कोई लेना देना नहीं है। मेरे लिए हर वो बच्चा जिसमे आत्मा है वह सभी मेरे बच्चे है।”