हे चमत्कारी आत्मा,
चलिए शुरू करते है आज का कॉस्मिक मेल हमारे अलौकिक पिता ब्रम्हांड का शुक्रिया करते हुए।

सवाल: किस प्रकार का बच्चा आपका सबसे प्रिय बच्चा है?

अलौकिक पिता परमात्मा का जवाब:

“मेरे प्यारे बच्चो,
मैं आपका अलौकिक पिता परमात्मा हूं। मैं हमेंशा चाहता हूं की मेरे बच्चे बहोत खुश रहे। इस सवाल पे सबसे पहले तो मैं ये कहना चाहता हूं की हर एक बच्चा मेरा प्रिय बच्चा है। लेकिन मैं तुम्हारा सवाल समझता हूं।

यहाँ बात प्रिय और अप्रिय की नहीं है। दुःख होता है जब मेरे किसी बच्चे को बारी बारी से इस जन्म मरण के फेरे लेने पड़ते है। इस जन्म मरण के फेरे के आगे मोक्ष द्वार है और वह द्वार के आगे एक और सफर है जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते। यह जन्म मरण का फेरा तो सिर्फ पहला पड़ाव है और इसका लक्ष्य है आत्मज्ञान हासिल करके मोक्ष की प्राप्ति करना। उसके बाद एक और सुखदायी सफर शुरू होता है जिसका लक्ष्य बहोत अलग है और उस लक्ष्य की बात आप अभी नहीं समज पाएंगे। जरूर सवाल खड़ा हो जायेगा आपके मन मे की क्यों नहीं समज पाएंगे। चलिए इसको एक उदाहरण के सहारे समझते है।

कोई एक बच्चा जिसको अंको का ज्ञान ही नहीं है। मतलब की वह बच्चे को पता ही नहीं है की अंक क्या होते है, अंको की लिखावट कैसी होती है, अंको का मतलब क्या होता है। अगर कोई बच्चा जानता ही नहीं की एक के बाद दो और दो के बाद तीन आता है। अगर ऐसे बच्चे को मैं एक गिनती गिनने को दू की 456 × 328 = कितना होता है तो वह बच्चा सिर्फ मुस्कुराएगा या तो चिंतित हो जायेगा की ये सब क्या है।

कुछ ऐसी ही चीज़े यहाँ पर भी लागू होती है। आत्मज्ञान और मोक्ष सबसे पहला पड़ाव है। यह अंको का ज्ञान है इस लिए पहले इसको समजना अत्यंत आवश्यक है तब ही मेरे बच्चे आगे के सफर और उसके लक्ष्य को समज पाएंगे।

तो तुम्हारे सवाल का जवाब यही है की मैं चाहता हूं मेरे बच्चे आत्मज्ञान हासिल करके मोक्ष की प्राप्ति करें और इस जन्म मरण और कर्मो के बंधनो से आज़ाद हो जाये।”