हे ज्ञानी आत्मा,
चलिए शुरू करते है आज का कॉस्मिक मेल हमारे अलौकिक पिता ब्रम्हांड का शुक्रिया करते हुए।

सवाल: क्या इंसान का पुनःजन्म इंसान ही होता है?

अलौकिक पिता परमात्मा का जवाब:

“मेरे प्यारे बच्चो,
मैं आपका अलौकिक पिता परमात्मा हूं। मैं हमेंशा चाहता हूं की मेरे बच्चे बहोत खुश रहे। इस सवाल को समजना बहोत आसान है।

हर एक जीव अलग अलग कर्म करता है। मनुष्य को छोड़ के कोई भी जीव कर्मो के बंधन मे नहीं फसता है कभी। बाकि सारे जीव इस सृष्टि की सेवा मे लगे होते है। इस सृष्टि के संतुलन के लिए वह बेहद जरुरी होते है। मैंने सिर्फ मनुष्य को उत्तम तर्क करने की काबिलियत दी है ताकि वह आत्मज्ञान हासिल करके मोक्ष की प्राप्ति कर सके और एक नये सफर की और अपना कदम बढ़ाये। इसका उत्तम उदाहरण आप सभी के सामने है, मेरे बच्चो। क्या कभी किसी परिंदे को मोबाइल फोन से बात करते देखा है? क्या किसी शैर को प्लेन उड़ाते हुए देखा है? अगर आप सोचो तो मनुष्य बाकि जीव से काफी अलग और सक्षम है हर चीज मे।

जब बाकि जीवो के कर्मो का लेखा जोखा है ही नहीं तो अवश्य वह मनुष्य योनि के लिए नहीं बना है। और जब मनुष्य के कर्मो का लेखा जोखा किया जा रहा है तो अवश्य वह मनुष्य योनि मे ही जन्म लेगा। तो हा, मनुष्य का जन्म केवल मनुष्य योनि मे ही होता है।”