हे शांत आत्मा,
चलिए शुरू करते है आज का कॉस्मिक मेल हमारे अलौकिक पिता ब्रम्हांड का शुक्रिया करते हुए।

सवाल: ध्यान कैसे करते है?

अलौकिक पिता परमात्मा का जवाब:

“मेरे प्यारे बच्चो,
मैं आपका अलौकिक पिता परमात्मा हूं। मैं हमेंशा चाहता हूं की मेरे बच्चे बहोत खुश रहे। महत्वपूर्ण सवाल है ये।

ध्यान करने के लिए ज़मीन पर एक बिछौना लगाए और उस पर सीधे बैठ जाइये। अंगुलियों को आपस मे फसा लीजिये। पेरो को पद्मासन लगा के बैठिये। सर थोड़ा सा ऊपर की तरफ रखिये। आराम से बैठे लेकिन आपकी पीठ सीधी रेहनी चाहिए। आँखे बंध रखे। बंध आँखों से दोनों आँखों के बिच मे जहा तिलक लगाते है वहा ध्यान केंद्रित करें क्यूंकि आपकी आत्मा वही रहती है। अपनी आती जाती साँसों को महसूस करें लेकिन याद रहे आपका सांस लेना अनायाश होना चाहिए। इस दौरान आपको कई विचार आ सकते है लेकिन विचारों का पीछा ना करें। विचार को बंध करने का प्रयास भी ना करें क्यूंकि एक विचार को बंध करने के लिए ही दूसरे विचार का जन्म होता है। जब कभी भी विचार आये तो पुनः अपनी साँसों को महसूस करें।

ध्यान कभी भी कर सकते है लेकिन सुबह 4 बजे ब्रम्ह मुहूर्त मे करना सबसे उचित होता है। शुरुआत मे केवल 15 मिनिट तक करें फिर हर 7 दिन मे थोड़ा थोड़ा बढ़ाये।

ऐसा करने से आपको आत्मज्ञान होगा। आपके कर्मो का हिसाब मिट जायेगा और आप मोक्ष की प्राप्ति कर पाएंगे।”