हे शक्तिशाली आत्मा,
चलिए शुरू करते है आज का कॉस्मिक मेल हमारे अलौकिक पिता ब्रम्हांड का शुक्रिया करते हुए।

सवाल: क्या भगवान है?

अलौकिक पिता परमात्मा का जवाब:

“मेरे प्यारे बच्चो,
मैं आपका अलौकिक पिता परमात्मा हूं। मैं हमेंशा चाहता हूं की मेरे बच्चे बहोत खुश रहे। यह एक गहरा सवाल है लेकिन जवाब ऊपर ही तैर रहा है।

किसी भी चीज को जान ने से पहले बहोत जरुरी होता है उसके मतलब को जान लेना। ‘भगवान’ दो शब्दों का मिश्रण है ‘भग’ और ‘वान’। भग एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है संपत्ति। ये कुछ उसी तरह का शब्द है जिसका प्रयोग हम रोज़ाना करते है जैसे एक होता है धनवान। जिसके पास धन है और उसका वो मालिक है उसे हम धनवान कहते है वैसे ही बना है भगवान जिसके पास ये सारी संपत्ति (धरती, हवा, पेड़ पहाड़ वगेरा) है और उसका वो मालिक है उसे हम भगवान कहते है।

अब सवाल है की क्या भगवान है? तो बहोत आसान सा जवाब है की हा भगवान है। ये सब मैंने बनाया है। मैं इसका मालिक हूं। मैं ही भगवान हूं। लेकिन यह दुविधा मे मत पड़ जाना अब की मैं किसी धर्म से जुडा हूं। वो मैंने नहीं बनाया। वह तो आपने बनाया है। मैं सार्वजनिक भगवान हूं।”