हे शांत आत्मा,
चलिए शुरू करते है आज का कॉस्मिक मेल हमारे अलौकिक पिता ब्रम्हांड का शुक्रिया करते हुए।

सवाल: नसीब क्या है? और क्या उसे बदला जा सकता है?

अलौकिक पिता परमात्मा का जवाब:

“मेरे प्यारे बच्चो,
मैं आपका अलौकिक पिता परमात्मा हूं। मैं हमेंशा चाहता हूं की मेरे बच्चे बहोत खुश रहे। नसीब एक बहोत ही प्यारी चीज है। आइये समझते है।

बहोत सुना है लोगो को बात करते की मेरा नसीब ख़राब है। तो क्या है ये नसीब और ये क्यों किसीका ख़राब तो किसीका अच्छा है? क्या ये भेदभाव मैंने किया है मेरे बच्चो के साथ? नहीं।

नसीब एक आयना है। उसमे जो भी दिख रहा है वह सब आपके किये हुए कर्मो का प्रतिबिंब है। वह कर्म पिछले जन्म के भी हो सकते है या इस जन्म के भी। जिस हिसाब से आपने कर्म किये है उसी प्रकार का प्रतिबिंब आपके नसीब के आयने मे दिखेगा।

कुछ लोग होते है जो बहोत अच्छे होते है, बेहद संघर्ष करते है लेकिन उसको अच्छा परिणाम नहीं मिलता है फिर अंत मे वह यही बोलते है की मेरे नसीब मे साथ नहीं दिया। फिर वह टूट जाते है और संघर्ष करना ही छोड़ देते है यह सोच कर की मैंने ज़िन्दगी मे कभी किसीका बुरा नहीं किया फिर मुझे ही यह परेशानिया क्यों उठानी पड़ रही है? सवाल भी जाइस है। लेकिन वह ये नहीं जानते की वे उनके पिछले जन्म के कर्मो का परिणाम वह भुगत रहे होते है। अब ये पिछला जन्म की बाते मान लेना थोड़ा मुश्किल है क्यूंकि वह अनुभव के बाहर है। तो सोचिये की कोई बच्चा पैदा होते ही क्यों कैंसर से पीड़ित है? उसने तो अभी कोई कर्म किया ही नहीं है। यही से मालूम चलता है की हा यह पिछले जन्म का लेखाजोखा है। जितना उधार लिया है उतना तो चुकाना ही है आज नहीं तो कल।

अब ये भी जान लीजिये की बच्चे बुरे कर्म क्यों कर बैठते है। इसकी सिर्फ एक ही वजह है की बच्चो को आत्मज्ञान नहीं हुआ है कभी और नहीं बच्चो ने उस दिशा मे कभी प्रयास भी किया है।

अब रही बात नसीब को बदलने की। तो क्या नसीब को बदला जा सकता है? हा, अवश्य ही बदला जा सकता है। जैसे ही बच्चे को आत्मज्ञान होता है उनके सारे बुरे कर्म धूल जाते है। बच्चा कर्मो के बंधन से परे हो जाता है। उसके बाद बच्चा मुझसे यानि की पिता परमात्मा से जुड़ जाता है। यहाँ अनंत आनंद है। यहाँ परम शांति है। यहाँ कोई नसीब का आयना नहीं है। यहाँ कोई कर्म का बंधन नहीं है। बच्चा सत्त प्रतिशत आनंद के सागर मे तैरता रहता है। और यही हमारे जीवन का पहला लक्ष्य है।”