हे चमत्कारी आत्मा,
चलिए शुरू करते है आज का कॉस्मिक मेल हमारे अलौकिक पिता ब्रम्हांड का शुक्रिया करते हुए।

सवाल: क्या ध्यान से भविष्य देखा जा सकता है?

अलौकिक पिता परमात्मा का जवाब:

“मेरे प्यारे बच्चो,
मैं आपका अलौकिक पिता परमात्मा हूं। मैं हमेंशा चाहता हूं की मेरे बच्चे बहोत खुश रहे। सवाल तो बड़ा अच्छा है। आइये समझते है।

भविष्य। क्यों हम जानना चाहते है भविष्य? सिर्फ दो मतलब हो सकते है। एक की कितना दुःख है आगे और दूसरा कितना सुख है आगे। अगर मैं आपसे कहु की आप अकाल मृत्यु को प्राप्त हो जाओगे तो आप मन से आज ही मर जाओगे। अगर मैं कहु की आप कल दुनिया के सबसे धनिक व्यक्ति बन जाओगे तो आप आज प्रयास ही नहीं करोगे। इसका मतलब समझे आप? भविष्य चलित है। भविष्य लिखने का मौका है आज। उसको जान ने की कोशिश ना करें। उसको लिखने का प्रयास करें।

ध्यान। ध्यान की चरमसीमा आपको ज्ञान की प्राप्ति करता है ताकि आपको पता चले की आज क्या लिखना है। और फिर आप जो लिखोगे वही आपका भविष्य बनके सामने आएगा।

तो, भविष्य चलित है। और चलित वस्तु पे विश्वाश नहीं किया जा सकता।”