हे चमत्कारी आत्मा,

चलिए शुरू करते है आज का कॉस्मिक मेल हमारे अलौकिक पिता ब्रम्हांड का शुक्रिया करते हुए।

सवाल: क्या हम भगवान बन सकते है?

अलौकिक पिता परमात्मा का जवाब:

“मेरे प्यारे बच्चो,
मैं आपका अलौकिक पिता परमात्मा हूं। मैं हमेंशा चाहता हूं की मेरे बच्चे बहोत खुश रहे। मासूम सा सवाल है ये।

भगवान की व्याख्या मैंने इससे पहले दी हुई है। फिर भी एक बात दोहरा देता हूं। भगवान यानि इस सारे सर्जन का मालिक। अब खुद दिमाग़ पे ज़ोर दीजिये। क्या ये सारा सर्जन आपने किया है? क्या आप ऐसा सर्जन कर सकते है? क्या कभी पपीते का बीज आम दे सकता है?

लेकिन, आप भगवान जैसे जरूर बन सकते हो। इस जन्म का लक्ष्य है आत्मज्ञान हासिल करना। मोक्ष की प्राप्ति करना। यह पहला पड़ाव है। ऐसा करते ही आप जन्म मरण के बंधनो से मुक्त हो जाओगे। उसके बाद एक और आनंददायी सफर, एक और लक्ष्य के साथ आपको आगे बढ़ना है। वहा शरीर नहीं है। वहा सूक्ष्म शरीर है। आगे का सफर सूक्ष्म शरीर के साथ तेय करना है। वो भी एक पड़ाव है। उसको भी पार करते एक और पड़ाव है। ऐसे सात पड़ाव है। वैसे ही सात पड़ाव पार करने पर आप को कोई सवाल नहीं रहेगा। उसके बाद आप भगवान जैसे हो जाओगे।”

इस मृत्युलोक मैं आपको जो भी सवाल आते है वह बहोत नाजुक है। कभी सोचा की आपको भगवान क्यों बनना है? क्या करोगे भगवान बनके? अगर ज़ोर देके सोचोगे तो इसके पीछे जरूर आपका कोई ना कोई स्वार्थ छिपा होगा। और स्वार्थ केवल मृत्युलोक मे चलता है। देवलोक मे नहीं।”