हे चमत्कारी आत्मा,
चलिए शुरू करते है आज का कॉस्मिक मेल हमारे अलौकिक पिता ब्रम्हांड का शुक्रिया करते हुए।

सवाल: क्या समययात्रा संभव है?

अलौकिक पिता परमात्मा का जवाब:

“मेरे प्यारे बच्चो,
मैं आपका अलौकिक पिता परमात्मा हूं। मैं हमेंशा चाहता हूं की मेरे बच्चे बहोत खुश रहे। आईये बात करते है समययात्रा के बारे मे।

यात्रा हम सब जानते है। लेकिन समय की यात्रा को समजना जितना मुश्किल है उतना ही आसान भी है। सबसे पहले समय को समज लेते है। क्या होता है समय? सोचा कभी?

समय मतलब जीवन का अनुभव। आईये जानते है कैसे। आप अभी वर्तमान की यात्रा कर रहे है जो आयी है भविष्यकाल से लेकिन वह बहोत क्ष्णिक है और तुरंत भूतकाल मे बदल जाएगी। वह तुरंत ही भविष्यकाल से वर्तमान और वर्तमान से भूतकाल मे तप्दिल हो जाती है। इसका मतलब हुआ वर्तमान का आयुष्य बहोत छोटा है लेकिन बहोत महत्वपूर्ण है। अगर वर्तमान नहीं रहा तो भविष्कल नहीं रहेगा। रह जायेगा सिर्फ भूतकाल। तो यहाँ वर्तमान जो की बहोत महत्वपूर्ण है उसको पकड़ के आगे चलते है।

यात्रा मतलब अनुभव। अगर इस वर्तमान मे हम अनुभव करना ही बंध करदे तो क्या होगा? ना भविष्य रहेगा ना ही वर्तमान। रह जायेगा सिर्फ भूतकाल। जब हम अनुभव करना बंध कर देते है ध्यान के माध्यम से तो समय रुक जाता है। मतलब हम पर समय का असर नहीं नहीं होता है।

अब मान लो की आपने 2020 से 2025 तक ध्यान किया। मतलब समय आपके लिए 5 राल रुका हुआ था लेकिन बाकि दुनिया 5 साल आगे निकल गयी है और आप वही 2020 मे है। अब आप ध्यान से जगे है तो आपका समय फिर से शुरू हुआ तो आप इस वक़्त 2020 मे बैठे बैठे 2025 की यात्रा कर रहे है। आप भविष्य की यात्रा कर रहे है और आपको यह महसूस होगा की पलक झपकते आप 2025 मे पोहोच गए क्यूंकि आपका समय अनुभव तो बंध था। आपका समय तो रुका हुआ था। आपको 5 साल का अनुभव होगा ही नहीं जो बाकि दुनिया को हुआ।

ये थोड़ा मुश्किल है समजना लेकिन बहोत आसान है अगर इसको अनुभव से जोड़ा जाये तो।”