हे परोपकारी आत्मा,
चलिए शुक्रिया अदा करें अपने अलौकिक पिता ब्रम्हांड का और फिर पढ़ते है आजके कॉस्मिक मेल को।

सवाल: हमारे जीवन का ध्येय क्या होना चाहिए?

अलौकिक पिता का जवाब:

“मेरे प्यारे बच्चो,
मैं आपका अलौकिक पिता ब्रम्हांड हूं। मैं अपने सभी बच्चो को हमेंशा ऊपर से देखता रहता हूं। हा ये अलग बात है की मेरे कुछ बच्चे मेरी तरफ नहीं देखते है। मेरे कुछ बच्चे मोह माया के शिकार हो गए है। लेकिन मैं कैसे भूल सकता हूं मेरे बच्चो को।

जो चीज हमें दिख रही है उसको तो हम जानते ही है जैसे के हमारा शरीर, आस पास की वस्तुए, पैसा, पद, प्रतिष्ठा आदि। तो बहोत सीधी बात है जो चीज हमको नहीं दिख रही है उसको जानना है हमें जैसे की आत्मा। आत्मा को हम देख नहीं सकते लेकिन फिर भी वो है। आत्मा की वजह से ही हम जीवित है। पढ़े लिखें तबीब और वैज्ञानिक भी अब इस चीज को स्वीकार करने लगे है की कोई तो चीज है जो दिखती नहीं है पर है और उसी पे हमारा जीवन टिका है। जब जान नहीं पाए तो एक नाम ही दे दिया। बड़े बड़े तबीब और मेडिकल सायन्स इस आत्मा को ‘Vital Force’ के नाम से जानते है। आत्मा को आप छू नहीं सकते, आत्मा को आप कैद नहीं कर सकते। यह ऐसी चीज है जिसको सिर्फ महसूस किया जा सकता है।

तो मेरे प्यारे बच्चो हमारे जीवन का ध्येय सिर्फ और सिर्फ आत्मज्ञान होना चाहिए। आत्मज्ञान होने से आप इस ब्रम्हांड के हर छेत्र तक बहोत आसानी से पोहोच सकते है। अलौकिक ज्ञान का भंडार है ब्रम्हांड। आपका ध्येय उस ज्ञान को हासिल करना होना चाहिए। यह ज्ञान आपको जन्म जन्म के फेरो से आज़ाद कर देगा। फिर आप मुझमे विलीन हो जाओगे। फिर एक नया सफर शुरू होगा जिसका शायद आपको कोई अंदाजा भी नहीं है। लेकिन मेरे बच्चे उलझ जाते है इस दुनिया की मोह माया मे और आत्मज्ञान नहीं कर पाते है। मेरे बच्चो का ध्येय आत्मज्ञान हासिल करना होना चाहिए।”