प्रिय शांत स्वरुप आत्मा,
चलिए धन्यवाद करते है अपने अलौकिक पिता ब्रम्हांड का और शुरू करते है आज का कॉस्मिक मेल।

ध्यान का महत्व क्या है और क्यों हमें ध्यान करने की आवश्यकता है?

इस सवाल पे हमारे अलौकिक पिता ब्रम्हांड हमसे कुछ कहना चाहते है:

मेरे प्यारे बच्चो,
मैं आपका अलौकिक पिता ब्रम्हांड हूं। मैं हमेंशा आपके साथ हूं। आपके जीवन, मृत्यु, धर्म, कर्म आदि हर एक पहलु का मैं एक मात्र चश्मदित गवाह हूं। मेरे बच्चो का आजका सवाल बहोत नादान है और उसका जवाब तो उनसे भी नादान है।

ध्यान! वैसे तो बड़ा सरल सा शब्द है लेकिन उसकी ताकत का मेरे बच्चो को शायद कोई अंदाजा नहीं है। मैं आपका अलौकिक पिता होने के नाते मेरे सारे बच्चो को आज ध्यान का महत्व समझाऊंगा।

मोबाइल जो आजकल आप सबका चहिता उपकरण है। उसीके उदाहरण से समझने की कोशिश करते है। मोबाइल का एक बॉडी होता है जिसमे स्क्रीन, स्विच, कैमरा, स्पीकर, बैटरी आदि। मोबाइल को हम रोज़ रात को चार्ज करते है ताकि दूसरे दिन उसे इस्तेमाल कर सके।

वैसा ही कुछ हमारे साथ भी है। हमारा भी एक बॉडी यानि की शरीर है जिसमे दिमाग़, दिल, आँखे, नाक, कान आदि है। हम भी मोबाइल की तरह अपने शरीर को रोज़ चार्ज करते है खाना खाके ताकि अगले दिन हम काम कर सके।

मोबाइल मे बॉडी के आलावा एक और चीज है जिसको हम सिम कार्ड कहते है। वैसे ही हमारे शरीर के अंदर एक चीज है जिसको हम आत्मा कहते है। बिना सिम कार्ड के मोबाइल का क्या ही उपयोग हो सकता है भला! वैसे ही बिना आत्मा के शरीर कुछ भी नहीं है।

मोबाइल की आत्मा यानी सिम कार्ड को भी हमें खाना देना पड़ता है जिसको हम रिचार्ज या टॉप-अप कहते है। अगर आपके सिम कार्ड मे पर्याप्त बैलेंस नहीं है तो वह काम करना बंध कर देगा और मोबाइल खुद अपने आप मे एक नाकाम खिलौना बन जायेगा। और अगर सिम कार्ड के अंदर पर्याप्त बैलेंस है तो आप दूर दूर तक बाते कर सकते हो। अपनों से जुड़ सकते हो। आप उस उपकरण का पूरा लाभ ले सकते हो। तो क्या करते है हम अपने सिम कार्ड को रिचार्ज करने के लिए? उस सिम कार्ड की जन्मदाता कंपनी को पैसो का भुगतान करके बैलेंस खरीदते है।

वैसे ही हमें भी हमारी आत्मा को खाना देना पड़ता है। अब आत्मा का भोजन क्या है? आत्मा का भोजन है विश्व शक्ति जो मैं बरसाता हूं ब्रम्हांड से। लेकिन आत्मा के रिचार्ज के लिए क्या करना पड़ता है? किस चीज के भुगतान से आत्मा रिचार्ज होती है? ध्यान के भुगतान से आत्मा रिचार्ज होती है।

तो अगर मेरे बच्चे अभी ध्यान नहीं कर रहे तो वे केवल बिना रिचार्ज के मोबाइल की तरह है। अपनी पूरी शक्तियों का इस्तेमाल नहीं कर रहे है चाहे वो कितने भी अमीर या गरीब क्यों ना हो पर वाह बिना रिचार्ज के मोबाइल के जैसे है। मोबाइल चाहे सस्ता हो या मेहेंगा, रिचार्ज तो करना ही पड़ता है।

मैं चाहता हु मेरे बच्चे अपनी अपार शक्तियों का अनुभव मारे ध्यान से रिचार्ज करके।”