हेलो शांत स्वरुप आत्मा,
आज के इस कॉस्मिक मेल को शुरू करने से पहले हम ब्रम्हांड का धन्यवाद करेंगे उन चीज़ो के लिए जो हमारे पास है. और उसके साथ एक संकल्प भी करेंगे की हम कभी उन चीज़ो को लेके दुखी नहीं होंगे जो हमारे पास नहीं है.

अगर हम सब ब्रम्हांड के बच्चे है और ये ब्रम्हांड हमारा अलौकिक पिता है तो वो हम सब बच्चों मैं इतना भेदभाव क्यों करते है?

इस सवाल पे हमारे अलौकिक पिता ब्रम्हांड हमसे कुछ कहना चाहते है:

“मेरे प्यारे बच्चों,
मैं आपका अलौकिक पिता हु. मैं ब्रम्हांड हु. आप सभी मेरे कण है. मेरे लिए मेरे सारे बच्चे बहोत ही कीमती और एक समान है. मैं अपने बच्चों मे कभी भेदभाव नहीं करता. आप जरूर सोच रहे होंगे की फिर की कोई कोई बच्चा बहोत धनिक और कोई बच्चा इतना गरीब क्यों है? इस भेदभाव को समझना बहोत आसान है वैसे अगर आप मेरी बातों पे गौर करें. मैंने इस सृष्टि को बनाया है जिसके आप एक हिस्से हो.
एक उदाहरण के तहत आप समज लो की मैंने अपने दो बच्चो को आग जलाना सिखाया. पहले बच्चे ने आग जला कर उसी आग से किसीका घर जलाया. पहले बच्चे से रहा नहीं गया और उसने तुरंत बावला होके शक्ति प्रदर्शन करने के लिए किसीका घर जला दिया जिसमे उसको कुछ देर के लिए आनंद भी मिला. उसको ये भी लगा की मैं शक्तिशाली हु. शक्ति का गलत इस्तेमाल करके पहले बच्चे ने अपना बुरा कर्म बनाया. कुछ दिन बीत गए और एक रोज़ दूसरा बच्चा जंगल से गुज़र रहा था तब उसके सामने एक शेर आ गया. शेर उसपे हमला करने ही वाला था की दूसरे बच्चे ने आग जलाई सिर्फ अपनी जान बचाने के लिए. शक्ति मैंने दोनों को बराबर दी थी लेकिन दोनों ने कर्म अलग अलग किये.
अब मेरे बच्चे कहते है की मैं भेदभाव करता हु. मैंने हमेंशा मेरे सभी बच्चों को एक समान समजा है लेकिन बच्चे अपना अपना कर्म कर रहे है. कोई अच्छा कर्म कर रहा है तो कोई बुरा और उसी के हिसाब से कोई सुख भोगता है और कोई दुख.
बच्चे अगर बिगड़े हुए हो तो भी मैं तो पिता ही हूं ना. मैं अपने सब बच्चों को खुश और सुखी देखना चाहता हूं. तो गभराये नहीं अगर आप भी उन बच्चो मे से है जिनसे कोई बुरा कर्म हो गया है. मैं, आपका अलौकिक पिता आपके साथ हूं. मुझपे भरोसा रखिये. मैं आपके सारे दुख दर्द दूर कर दूंगा. आप मुझसे जुड़े रहिये.
रोज़ सुबह उठ कर जहा सोये थे वही बैठ जाये. सीधे बैठे. आँखे मूंद कर बैठे. 7 बार इन पंक्तियों को दोहराये: मैं एक आत्मा हु.
ऐसा रोज़ करें. ऐसा करने से आप मुझसे जुड़ जाओगे और तभी मैं आपकी मदद कर पाउँगा.
याद रहे की मैं आपका अलौकिक पिता हु. मुझे मेरे सारे बच्चो की फिक्र हमेंशा रहती है. मैं आपके सारे दुख दर्द मिटा दूंगा. बस मुझसे जुड़े रहिये.”