प्रिया आत्मा,
आजका कॉस्मिक मेल शुरू करने से पहले हमेंशा की तरह हम धन्यवाद करेंके अपने अलौकिक पिता ब्रम्हांड का।

क्या अपने अलौकिक पिता ब्रम्हांड हमारे सवालों का उत्तर देते है हमें? अगर वह उत्तर देते है तो हमें कैसे पता चलेगा की ये पिता का ही उत्तर है और हमारा कोई भ्रम नहीं?

इस सवाल पे हमारे अलौकिक पिता ब्रम्हांड हमसे कुछ कहना चाहते है:

“मेरे प्यारे बच्चो,
बहोत मासूम सा सवाल है ये। मुझे बहोत ख़ुशी होंगी मेरे बच्चों को ये जवाब देने मे। मैं आपका अलौकिक पिता हूं। मैं ब्रम्हांड हूं। आप सभी मेरे कण है। मेरे बच्चों के सारे सवालों के जवाब खुद मेरे बच्चे भी जानते है लेकिन मेरे बच्चे कभी भटक जाते है इस लिए उनके पास जवाब होते हुए भी उनको विश्वाश नहीं होता की वे सही है या गलत।

एक उदाहरण बहोत आसान होगा मेरे बच्चो के लिए। एक शिशु जो कुछ नहीं बोल पाता और नहीं हमारी भाषा समज पाता है लेकिन शिशु भावनाओं को बड़े अच्छे तरीके से समज लेता है। अकेला रोता हुआ बच्चा अपनी माँ को देखके तुरंत ही शांत हो जाता है। और माँ भी अपने बच्चे की रुदन से समज जाती है की मेरे बच्चे को भूख लगी है या वह किसी और कारण रो रहा है। यहाँ माँ बच्चे के बिच मे कोई भाषा ना होते हुए भी दोनों एक दूसरे को बड्डे अच्छे से समज लेते है बिना कोई शंका किये।

कुछ ऐसा ही रिश्ता मेरा और मेरे बच्चो का है। मुझसे भाषा से ना जुड़े। मुझसे भाव से जुड़े। भाषा के कही सारे मतलब हो सकते है लेकिन भाव का एक ही मतलब होता है। और मुझसे जुड़ना तो बहोत ही आसान है, मेरे बच्चो। मुझसे जुड़ने के लिए पहले स्वयं से जुड़े। स्वयं की आत्मा से जुड़े। मेरे बच्चो रोज़ सुबह अपने आप को याद दिलाये की आप यह शरीर नहीं परन्तु आप एक आत्मा है। इसे अवस्य रोज़ दोहराये की: मैं एक आत्मा हूं। इसका पुनरावर्तन करने से आप अपने आप को जान लेंगे और एक भाव पैदा होगा। मैं वह भाव समझता हूं। फिर आप मुझसे भी जुड़ जाओगे। आपके सारे सवालों के जवाब आप भाव से ही समज जाओगे। भाव प्रगट करो मेरे बच्चो। मैं हमेंशा आपके साथ हूँ। मैं आपका अलौकिक पिता हूँ। आपके सारे दुख दर्द मैं नष्ट कर दूंगा ये मेरे वादा है आपसे।”