हे महान आत्मा,
आओ मिलके हमारे अलौकिक पिता ब्रम्हांड का शुक्रिया करने से शुरुआत करते है आजके कॉस्मिक मैं की।

क्या हमारे जीवन मे भारी नकारात्मकता को हम कभी निकल सकते है ताकि तुम सकारात्मकता का प्रयोग करके अपने जीवन को खुशियों से भर सके?

इस सवाल पे हमारे अलौकिक पिता ब्रम्हांड हमसे कुछ कहना चाहते है:

मेरे प्यारे बच्चो,
बहोत ही आसान है इस सवाल के जवाब को समजना। मेरे सारे बच्चे मेरे कण कण मे से बने है और मैं आपका अलौकिक पिता मेरे सारे बच्चो की सारी परेशानिया दूर करने के लिए हमेंशा तत्पर रहता हु।

नकारात्मकता को जीवन से निकलना उतना ही कठिन है जितना एक बाल मे छेद करके उसीमे दूसरे बाल को पिरोना. लेकिन इसका मतलब ये नहीं की मेरे बच्चो को मैं रास्ता नहीं दिखा सकता। मेरे पास मेरे बच्चो की हर एक समस्या का समाधान है।

एक उदाहरण के तहत मैं अपने बच्चो को इस समस्या का समाधान सिखाऊंगा। मान लो की एक कमरा है जिसमे बहोत अंधेरा है। तो ये अंधेरा जो है वह नकारात्मकता है। अगर मैं अपने किसी बच्चे से कहु की उस कमरे मे जाओ और वहा से थोड़ा अंधेरा बाहर लेके आओ तो बच्चा परेशान हो जायेगा की अँधेरे को पहले तो पकडे कैसे और अगर पकड़ ही नहीं पाए तो उसको बाहर लाये कैसे। बस इसी लिए मैं अपने बच्चो से कहता हूं की नकारात्मकता को जीवन से निकाल ना बहोत ही कठिन है। तो फिर क्या करना चाहिए मेरे बच्चो को? बहोत आसान है। नकारात्मकता को नकाल ने की कोशिश ही नहीं करनी चाहिए क्यूंकि वह सारी कोशिश नाकाम रहेगी और एक और निराशा लाएगी जीवन मे। तो फिर क्या करेंगे मेरे बच्चे? मेरे बच्चे एक मोमबत्ती जलाएंगे और वही अँधेरे कमरे के एक कोने मैं रख के आएंगे। फिर एक दूसरी मोमबत्ती जलाएंगे और उसे दूसरे कोने मे रखेंगे। ऐसे करते करते कमरे मैं बहोत सारी मोमबतिया जलाएंगे तो एक दिन वह कमरा रौशनी से भर जायेगा और फिर कहीं भी अंधेरा नहीं रहेगा और यही तो चाहते है मेरे बच्चे की अंधेरा चला जाये और रौशनी कायम रहे।

तो इसका मतलब ये हुआ की मेरे बच्चो को अँधेरे मतलब नकारात्मकता को निकालने का प्रयास नहीं करना है बल्कि सिर्फ रौशनी को जलानेका कर्म करना है। इसका मतलब ये है की अपने जीवन मैं रौशनी यानि की सकारात्मक विचार भरने है ताकि नकारात्मक विचार अपने आप निकल जायेंगे।

याद रहे मेरे बच्चो की मैं हर हाल मे, हर स्वरुप मे, हर वक़्त आपके साथ हूं। मैं आपका अलौकिक पिता ब्रम्हांड हूं और मेरा केवल एक ही लक्ष्य है की मेरे सारे बच्चे बहोत खुश और सुखी रहे।”